Rakshabandhan 2021 : देशभर में रखी का त्योहार रक्षाबंधन धूमधाम से मनाया जा रहा है जहाँ बहनें भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर हमेशा रक्षा का वचन ले रहीं है तो वहीं भाई भी अपनी बहनों को राखी पर उपहार देकर बहन के प्रति अपने प्रेम को जता रहे हैं।
भाई और बहन के अगात प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन के त्योहार को पूरे देशभर में धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस त्योहार को लेकर भाई और बहनों में अलग ही उत्साह देखा जा रहा है जहां बहनें सुंदर कपड़े पहनकर भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर भाइयों से रक्षा का वचन ले रहीं हैं तो वहीं भाई भी बहनों को खुश करने के लिए सुंदर उपहार बहनों को भेंट कर रहे हैं।
एक महीने पहले से ही से ही सजे हैं बाजार
रक्षाबंधन के त्योहार को राखी के त्योहार के नाम से भी जाना जाता है जिसको लेकर एक महीने पहले से ही बाजार सुंदर राखियों से सजने लगे थे। रंग बिरंगी राखियां दुकान की शोभा बढ़ाती हुई दिखाई दे रही है तो वहीं बहने भी अपने भाई की कलाई में रखी बांधने के लिए रखी की खरीददारी करती हुई दिखाई दे रहीं है। जहां कई जगहों पर मोतियों की राखी मन मोह रही ही तो कई जगहों पर बहनें रेशम के धागे की राखियों को खरीदती दिखाई दे रही है।
रक्षाबंधन मनाने के क्या हैं धार्मिक मायने
Rakshabandhan 2021 : श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाए जाने वाले रक्षाबंधन के त्योहार को मनाने के वैसे तो कई धार्मिक मायने हैं लेकिन मुख्य रूप से राखी का त्योहार को मनाने के पीछे राजा बलि और भगवान विष्णु की कथा है दरहसल भगवान विष्णु ने असुर राज बलि की परीक्षा लेने के लिए वामन अवतार में असुरराज बलि से तीन पग भूमि का दान मांगा था जिसको देने के लिए असुरराज तैयार हो जाते हैं जिसके बाद भगवान विष्णु विशाल रूप धारण कर पहले और दुसरे पग में धरती और स्वर्ग को नाप लेते हैं और बालि से पूछते हैं कि मैं तीसरा पग कहा नापु तो राजा बलि भगवान विष्णु की माया को समझ जाते हैं और कहते हैं प्रभु आप तीसरा पग मेरे शीश पर रखें जिससे प्रसन्न होकर भगवान विष्णु राजा बलि को वरदान मांगने को कहते हैं जिसपर असुर राज बलि वरदान में उनसे अपने द्वार पर ही खड़े रहने का वर मांग लेते हैं। इस प्रकार भगवान विष्णु राजा बलि को तथस्तु कहकर अपने ही वरदान में फंस जाते हैं तब माता लक्ष्मी नारद मुनि से सलाह लेने पहुंचती हैं कि भगवान को कैसे बैकुंठ लाया जाए तब नारद जी माता लक्ष्मी से कहते हैं कि आप राजा बलि को भाई बनाकर उनकी कलाई में रखी बांधिए और उपहार स्वरूप भगवान विष्णु को मांग लीजिये। माता लक्ष्मी नारद जी के कहे अनुसार ही करती हैं और राजा बलि के हाथ में रक्षासूत्र बांधती है और उपहार में भगवान विष्णु की बैकुंठ में दोबारा वापसी मांगती है तभी से इस पावन त्योहार को रक्षाबंधन के रूप में मनाया जाता है। इसके अलावा भी रक्षाबंधन को लेकर कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं।