Mahashivratri 2022 : आखिर क्यों मनाई जाती है महाशिवरात्रि, क्या कुछ हैं धार्मिक मान्यताएं

Mahashivratri 2022 : आज पूरे भारत में शिवरात्रि की धूम है और हो भी क्यों ना क्योंकि यह त्यौहार साल में एक बार ही जो आता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शिवरात्रि की तो हर महीने आती है लेकिन महाशिवरात्रि साल भर में 1 बार आती है और फागुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि का त्यौहार मनाया जाता है।

Mahashivratri 2022 : यह त्यौहार मनाया क्यों जाता है किन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस

त्यौहार क्यों मानाने की रीत शुरू हुई थी ये बात भी अपने आप में महत्व रखती है। बताते चले की इस त्यौहार को लेकर कई आध्यात्मिक और धार्मिक कहानियां कहीं गई है ! कई लोग कहते हैं कि इसी दिन भगवान शिव और पार्वती का विवाह हुआ था और इसलिए महाशिवरात्रि मनाई जाती है लेकिन भगवान शिव का विवाह होने के अलावा इस त्यौहार को मनाने को लेकर क्या कुछ धार्मिक कहानिया है ये आज हम आपको बताने जा रहे है।

Mahashivratri 2022 :  महाशिवरात्रि को मनाने की एक नहीं बल्कि कई कारण हैं जो कुछ इस प्रकार है —

Mahashivratri 2022 : इस तरह संसार में उत्पन्न हुई थी शिवलिंग

Mahashivratri 2022 :

महाशिवरात्रि के दिन ही भगवान शिव पहली बार प्रकट हुए थे जी हां भगवान शिव का प्राकृटय ज्योतिर्लिंग यानी एक ऐसा शिवलिंग जिसका ना तो आधी था और ना ही अंत। बता दें की इसी शिवलिंग का पता लगाने के लिए ब्रह्मा जी और भगवान विष्णु ने अलग अलग रूप धारण किए। ब्रह्मा जी हंस के रूप में शिवलिंग के सबसे ऊपर भाग को देखने की कोशिश में जुटे और भगवान विष्णु वराह रूप लेकर शिवलिंग के आधार ढूंढ निकले। लेकिन कहते हैं हजारों साल तक ढूंढने के बाद भी ब्रह्मा जी और भगवान विष्णु को शिवलिंग का अंत नहीं मिला। फिर हुआ ये कि ब्रह्मा जी ने यह सोचा कि अगर किसी को यह पता चलेगा कि उन्हें शिवलिंग का अंत नहीं मिल पाया है तो फिर भगवान विष्णु को ज्ञानी समझा जाएगा और इसलिए भगवान ब्रह्मा ने उस समय झूठ बोला था और यह कहा था कि उन्हें शिवलिंग का अंत मिल गया है। कहते है तब एक आकाशवाणी हुई थी कि मैं शिवलिंग हूँ और ना ही मेरा कोई अंत है और ना ही कोई शुरुआत ! तभी से शिवलिंग से भगवान शिव जी प्रकट हुए और इसी भगवान शिव की प्रतिमाविहीन चिन्ह शिवलिंग संसार में उत्पन्न हुई।

Mahashivratri 2022 : इसी दिन 64 जगह पर प्रकट हुए थे शिवलिंग

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एक कथा ऐसी भी है कि महाशिवरात्रि के दिन ही शिवलिंग अलग-अलग 64 जगह पर प्रकट हुए थे और इन शिवलिंग में से हमें केवल 12 के ही नाम पता है और इन्हें हम 12 ज्योतिर्लिंग के नाम से जानते हैं। आपको बता दें की महाशिवरात्रि के दिन उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में लोग दीपस्तंभ लगाते हैं दीपस्तंभ इसलिए लगाया जाता है ताकि लोग शिव जी के अग्नि वाले अनंत लिंग का अनुभव ना कर सके।

Mahashivratri 2022 : इस दिन हुआ था शिव और शक्ति का मिलन

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जानना  यह भी जरूरी है कि महाशिवरात्रि के दिन ही भगवान शिव और शक्ति का मिलन हुआ था जी हां इस दिन भगवान शिव की शादी का उत्सव मनाया जाता है। मान्यता ऐसी है कि शिवरात्रि को भगवान शिव की शक्ति यानी मां पार्वती से शादी हुई थी। इस दिन शिव जी ने वैराग्य जीवन छोड़कर ग्रस्त जीवन में प्रवेश किया था और इसी खुशी में शिवरात्रि का महोत्सव मनाया जाता है। कारण कही है लेकिन सब का मकसद एक ही है और वह है भगवान की भक्ति में लीन होना।

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