Uttarakhand Breaking : उत्तराखण्ड कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता एवं उत्तर प्रदेश की मीडिया प्रभारी गरिमा माहरा दसौनी ने प्रधानमंत्री मोदी के ऋषिकेश दौरे पर कटाक्ष किया है। दसौनी ने कहा कि पिछली बार जब प्रधानमंत्री मोदी उत्तराखंड आये थे, तब हमने उनसे इन विषयों पर अंकिता भंडारी हत्याकांड, राज्य में बेरोज़गारी , अग्निपथ योजना के ख़लिफ़ राज्य में बढ़ता विरोध, सिल्क्यारा सुरंग हादसे की जांच जैसे गंभीर र मुद्दों पर बोलने का आग्रह किया था ।
1. पिछले साल दिसंबर में, अन्य राज्यों के लोगों को कृषि भूमि की बड़े पैमाने पर बिक्री पर रोक लगाने और सख़्त भूमि अधिकार कानूनों की मांग करने के लिए हज़ारों प्रदर्शनकारी देहरादून में एकत्र हुए थे। उत्तराखंड एकमात्र हिमालयी राज्य है जो बाहरी लोगों को कृषि भूमि बेचने की इजाज़त देता है। 2003 में, राज्य की कांग्रेस सरकार ने बाहरी लोगों को कृषि भूमि की बिक्री को प्रतिबंधित कर दिया था। अधिकतम 500 वर्ग मीटर की ख़रीद की अनुमति थी। वह भी केवल खेती के प्रयोजनों के लिए।
2. दिसंबर में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (छब्त्ठ) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, नौ हिमालयी राज्यों में से उत्तराखंड में महिलाओं और बच्चों के बलात्कार के सबसे अधिक मामले दर्ज़ किए गए। तीन साल पहले की तुलना में 2022 में महिलाओं के ख़लिफ़ अपराध 77ः बढ़ गए, और भाजपा शासन में महिलाओं के ख़लिफ़ अपराधों की दर लगभग दोगुनी हो गई है –
3. मोदी सरकार ने गंगा नदी में पानी की गुणवत्ता में सुधार के लक्ष्य के साथ 2014 में नमामि गंगे योजना शुरू की थी। इसके तहत 2014 और 2019 के बीच 20,000 करोड़ के ख़र्च को मंजूरी दी गई थी और 2021 तक 815 नए सीवेज उपचार संयंत्र (एसटीपी) बनाए या प्रस्तावित किए गए। जल शक्ति मंत्रालय का दावा है कि नदी की स्थिति में काफ़ी सुधार हुआ है लेकिन, जैसा कि इस सरकार के मामले में अक़्सर होता है, वह दावा झूठ निकला। संकट मोचन फाउंडेशन ने पाया कि सुधार के बजाय, गंगा में पानी की गुणवत्ता वास्तव में लगातार ख़राब हो रही है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी पाया कि पानी की गुणवत्ता उनके मानकों के अनुरूप नहीं है। जल शक्ति मंत्रालय का दावा है कि नए एसटीपी ठीक काम कर रहे हैं। लेकिन आईआईटी वाराणसी के एक प्रोफेसर ने कहा कि सरकार की योजनाएं पूरी तरह से “फर्जी“ थीं। इसके अलावा, 2017 के शुरुआत में, परियोजना की एक सीएजी ऑडिट रिपोर्ट में “वित्तीय प्रबंधन, कार्यान्वयन और निगरानी में खामियों“ का उल्लेख किया गया था। मामले को बदतर बनाने के लिए, एसटीपी के ठेके उन कंपनियों को दिए गए हैं जिनका भाजपा से गहरा संबंध है।
4. प्रधानमंत्री मोदी ने ऋषिकेश की चुनावी रैली में सम्बोधन के दौरान कहा कि 2019 में प्रदेश के 100 पानी के नलों में से मात्र 9 नलों में जल था और आज 10 में 9 नलों में जल है, तो प्रधानमंत्री जी से पूछना था कि 2014 से 2019 के बीच केन्द्र में भी आप ही सरकार थी और राज्य में भी पॉचों सांसद आप ही के दल के थे तो फिर यदि 100 में से 9 ही नलों में जल था तो किसकी गलती थी?