Navratri 2021 : अक्टूबर से नवरात्रि का त्यौहार देशभर में शुरू हो चुका है और जैसा कि आप जानते हैं कि नवरात्रि के 9 दिनों में श्रद्धालु मां भगवती के अलग-अलग स्वरूपों की वंदना करते हैं । आज नवरात्रि का तीसरा दिन है जैसा कि तृतीय तिथि के अनुसार मां भगवती के तृतीय स्वरूप यानी मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। गौर करने वाली बात यह है की 9 अक्टूबर को सुबह 7:38 तक ही तृतीय तिथि है उसके बाद चतुर्थी तिथि लग जाएगी यानी तृतीय तिथि के मौके पर मां चंद्रघंटा के स्वरूप की वंदना करने के बाद भक्त चतुर्थी तिथि यानी मां के चतुर्थ स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा अर्चना करेंगे । आइए जानते हैं कि तृतीय तिथि पर मां चंद्रघंटा और चतुर्थी पर मां कूष्मांडा की पूजा अर्चना करने की विधि किस किस प्रकार है ।
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Navratri 2021 : ये है नियम
आपको सुबह में जल्दी स्नान करके पूजा के स्थान पर गंगाजल छिड़क कर शुद्धि करनी है । इसके बाद मां भगवती के सामने दीप प्रज्वलित करने के बाद मां दुर्गा का गंगाजल से अभिषेक करना है । इसके बाद आप मां दुर्गा को अर्ग दे और अंत में मां को अक्षत, सिंधुर, लाल पुष्प अर्पित करने के साथ ही मां को प्रसाद स्वरूप मिठाई भी चढ़ाएं । इसके बाद धूपबत्ती और दीपक जला कर मां भगवती के समक्ष दुर्गा चालीसा का पाठ करें । मां की आरती करने के बाद भोग लगाए । एक चीज का खासतौर पर ध्यान रखें कि मां को आप सात्विक चीजों का ही भोग लगाएं।
मां चंद्रघंटा की आरती
जय मां चंद्रघंटा सुख धाम।
पूर्ण कीजो मेरे सभी काम।
चंद्र समान तुम शीतल दाती।
चंद्र तेज किरणों में समाती।
क्रोध को शांत करने वाली ।
मीठे बोल सिखाने वाली ।
मन की मालक मन भाती हो ।
चंद्र घंटा तुम वरदाती हो।
सुंदर भाव को लाने वाली ।
हर संकट को बचाने वाली।
हर बुधवार जो तुझे ध्याये ।
श्रद्धा सहित जो विनय सुनाएं। मूर्ति चंद्र आकार बनाएं ।
सन्मुख घी की ज्योति जलाए।
शीश झुका कहे मन की बाता।
पूर्ण आस करो जगदाता।
कांचीपुर स्थान तुम्हारा।
करनाटिका में मान तुम्हारा ।
नाम तेरा रटू महारानी ।
भक्तों की रक्षा करो भवानी।
भोग – मां चंद्रघंटा की पूजा विधि विधान से करने के बाद उन्हें केसर की खीर और दूध से बनी मिठाई का भोग लगाना चाहिए । इसके बाद मां के सामने पंचायत चीनी व मिश्री भी अर्पित करनी चाहिए।

मां कूष्मांडा आरती
चौथा जब नवरात्र हो, कूष्मांडा को ध्याते
जिसने रचा ब्रह्मांड यह, पूजन है उनका
आघ शक्ति कहते जिन्हें, अष्टभुजी है स्वरूप ।
इस शक्ति के तेज से, कहीं छाव कहीं धूप ।
कुम्हड़े की बलि करती, तांत्रिक से स्वीकार ।
पेठे से भी रीझती, सात्विक करें विचार।
क्रोधित जब हो जाए, यह उल्टा करें व्यवहार ।
उसको रखती दूर मा, पीड़ा देती अपार।
सूर्य चंद्र की रोशनी ,यह जग में फैलाएं।
शरणागत कि मैं आया, तू ही राह दिखाएं ।
नवरात्रों की मां कृपा कर दो मां
नवरात्रों की मां कृपा कर दो मां
जय मां कुष्मांडा मैया
भोग – मां कुष्मांडा को हल्दी और दही का भोग लगाएं