How Did Kaliyuga Begin : महाभारत के बाद क्या हुआ और कैसे हुई कलयुग की शुरूआत

How Did Kaliyuga Begin :  सनातन धर्म के अनुसार सर्वोपरि धर्म ग्रंथों में से एक महाभारत के युद्ध को सभी ने जिन्दगी में एक ना एक बार जरूर पढ़ा या सुना होगा लेकिन युद्ध समाप्ति के बाद कई ऐसे प्रश्न हैं जो कौतूहल का विषय बने हुए हैं। जैसे पांडवों की जीत के बाद क्या हुआ और उनमें से कौन बचे? पांडवों ने कितने समय तक हस्तिनापुर पर शासन किया और उनकी मृत्यु कैसे हुई और इसके साथ ही भगवान कृष्ण ने शरीर को कैसे त्यागा ये सवाल भी ज़हन में जरूर आता है——

How Did Kaliyuga Begin : पांडवों ने हस्तिनापुर पर किया 36 साल शासन 

How Did Kaliyuga Begin

सभी सवालों के जवाब हम आपको इस लेख में देने जा रहे है . दरहसल महाभारत का युद्ध सिर्फ 18 दिन चला था जिसमें भारतीय पुरुषों की लगभग 80 फ़ीसद आबादी खत्म हो गई थी। कुरुक्षेत्र का युद्ध जीतने के बाद पांडवों का शासन हो गया और युधिष्ठिर के सर राजा का ताज सजाया गया और पांडवों ने हस्तिनापुर पर 36 साल शासन किया। । दूसरी तरफ कौरवों की मृत्यु से दुखी गांधारी ने कृष्ण को ख़ूब कोसा और अपने पुत्रों की भांति उनके और यदुवंश के नाश की कामना की। इस बीच गांधारी का कृष्ण को दिया श्रृाप असर दिखाने लगा। कृष्ण यदु वंशियों को लेकर प्रभासा चले गए। प्रभासा में यदु वंशियों में बग़ावत हो गई और यादवकुल खत्म होने की कगार पर आ गया। माना जाता है कि भगवान श्री कृष्ण के बच्चे भी उन्हीं की तरह चंचल और नटखट थे एक बार कृष्ण के पुत्र सांब को एक शरारत सूझी उसने पेट में कढ़ाई बांधकर एक गर्भवती स्त्री का वेश ले लिया और अपने दोस्तों के साथ ऋषि विश्वामित्र, दुर्वासा, वशिष्ठ और नारद से मिलने गया। वे सभी भगवान् श्रीकृष्ण के साथ एक औपचारिक बैठक में शामिल होने के लिए द्वारका आए थे। स्त्री के वेश में सांब ने ऋषियों से कहा कि वो गर्भवती है। वे उसे ये बताएं कि उसके गर्भ में बच्चे का लिंग क्या है। उनमें से एक ऋषि ने इस खेल को समझ लिया और क्रोधित होकर सांब को श्राप दिया कि वो लोहे के तीर को जन्म देगा, जिससे उनके कुल और साम्राज्य का विनाश होगा।

How Did Kaliyuga Begin : सात्याकि कृतवर्मा के पास पहुंचा

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सांब ने ये सारी घटना उग्रसेन को बताई, उग्रसेन ने सांब से कहा कि वे तांबे के तीर का चूर्ण बनाकर प्रभास नदी में प्रवाहित कर दे, इस तरह उन्हें उस श्राप से छुटकारा मिल जाएगा। सांबा ने सब कुछ उग्रसेन के कहे अनुसार ही किया। इस घटना के बाद द्वारका के लोगों ने विभिन्न अशुभ संकेतों का अनुभव किया। सुदर्शन चक्र कृष्ण के शंख, उनके रथ और बलराम के हल का अदृश्य हो जाना, अपराधों और पापों में बढ़ोत्तरी होना, लाज-शर्म जैसी चीजों का समाप्त हो जाना। ये सब देखकर भगवान कृष्ण परेशान हो गए और उन्होंने अपनी प्रजा से प्रभास नदी के तट पर जाकर तीर्थ यात्रा कर अपने पापों से मुक्ति पाने को कहा। सभी ने ऐसा ही किया। परंतु जब सभी यादव प्रभास नदी के किनारे पहुंचे तो वहां जाकर सभी मदिरा के नशे में चूर होकर, भोग-विलास में लिप्त हो गए। मदिरा के नशे में चूर सात्याकि कृतवर्मा के पास पहुंचा और अश्वत्थामा को मारने की साजिश रचने और पांडव सेना के सोते हुए सिपाहियों की हत्या करने के लिए उसकी आलोचना करने लगा। वही कृतवर्मा ने भी सात्याकि पर आरोप मढ़ने शुरू कर दिए। बहस बढ़ती गई और इसी दौरान सत्याकि के हाथ से कृतवर्मा की हत्या हो गई। कृतवर्मा की हत्या करने के अपराध में अन्य यादवों ने मिलकर सात्यकि को मौत के घाट उतार दिया।

How Did Kaliyuga Begin : भगवान कृष्ण परेशान हो गए

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ये सब देखकर भगवान कृष्ण परेशान हो गए और उन्होंने अपनी प्रजा से प्रभास नदी के तट पर जाकर तीर्थ यात्रा कर अपने पापों से मुक्ति पाने को कहा। सभी ने ऐसा ही किया। परंतु जब सभी यादव प्रभास नदी के किनारे पहुंचे तो वहां जाकर सभी मदिरा के नशे में चूर होकर, भोग-विलास में लिप्त हो गए। मदिरा के नशे में चूर सात्याकि कृतवर्मा के पास पहुंचा और अश्वत्थामा को मारने की साजिश रचने लगा और साथ ही पांडव सेना के सोते हुए सिपाहियों की हत्या करने की भी योजना बनाने लगा दोनों के बीच चर्चा चल ही रही थी की चर्चा ने बहस का रूप ले लिया और ये बहस इतनी बढ़ गई की सत्याकि के हाथ से कृतवर्मा की हत्या हो गई। कृतवर्मा की हत्या करने के अपराध में अन्य यादवों ने मिलकर सात्यकि को मौत के घाट उतार दिया। जब कृष्ण को इस बात का पता चला तो वे वहां पर प्रकट हुए और एरका घास को हाथ में उठा लिया। ये घास लागहे की छड़ में परिवर्तित हो गई जिससे श्रीकृष्ण ने दोषियों को सजा दी।

How Did Kaliyuga Begin : ऐसे यदुवंशों की मृत्यू हुई

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 मदिरा के नशे में चूर सभी ने घास को अपने हाथ में उठा लिया और सभी के हाथ में मौजूद वो घास लोहे की छड़ बन गई। जिससे सभी लोग आपस में ही भिड़ गए और एक-दूसरे को मारने लगे। और ऐसे यदुवंशों की मृत्यू हुई। ऐसा कहा जाता है की यदुवंशों का काल बनने वाली लोहे की छड़ उसी कढ़ाई के चूरे से बनी थी जिसको बांधकर श्रीकृष्ण के पुत्र सांब गर्भवती महिला का रूप धारण कर ऋषियों के पास गए थे और ऋषियों के श्राप से मुक्त होने के लिए कढ़ाई का चूरा कर दिया था। इस खूनखराबे के बाद जब भगवान श्री कृष्ण एकांतवास में बांसूरी बजा रहे थे तो तब एक शिकारी ने भगवान श्री कृष्ण को हिरण समझकर उनपर बांण चला दिया और वो बांण भगवान के चरणों में जा लगा जिससे उनकी मृत्यू हो गई।

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How Did Kaliyuga Begin : अगले जन्म में मेरी मृत्यु का कारण तुम ही बनोगे

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ऐसा माना जाता है की जब श्रीराम त्रेता युग में माता सीता को वापस लेकर अयोध्या लौटे थे तो उन्होंने वहां मौजूद सभी लोगों से कुछ ना कुछ वर मांगने को कहा इस पर वहां मौजूद बाली के बेटे अंगद ने श्रीराम से कहा कि प्रभु वैसे तो मैं आपका भक्त हूं लेकिन एक बेटा होने के नाते मैं आपसे अपने पिता के हत्यारे को मारने का वर मांगता हूं। अंगद यह जानता था कि उसके पिता की हत्या श्रीराम ने ही की है लेकिन पुत्र धर्म को निभाने के लिए उसने भगवान श्रीराम से ये मांगा था इस वर को मांगने पर श्रीराम ने अंगत से कहा था कि अंगत इस जन्म में तो नहीं लेकिन अगले जन्म में मेरी मृत्यु का कारण तुम ही बनोगे और ऐसे अंगद अगले जन्म में शिकारी के रूप में भगवान श्री राम की मृत्यू की वजह बना।

How Did Kaliyuga Begin : ऐसे हुआ द्वापर युग का अंत और कलयुग का शुभारंभ

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कृष्ण की मृत्यू के बाद हस्तिनापुर में अराजकता और अधर्म फैलने लगा था और द्वापारा युग समापति की ओर था तब वेद व्यास ने अर्जुन से कहा कि उनके और उनके भाईयों के जीवन का उद्देश्य पूरा हो गया है, जिसके बाद युधिष्ठिर ने राजपाट परीक्षित को सौंप दिया और खुद पांडवों और द्रोपदी के साथ हिमालय के मार्ग से स्वर्ग जाने के लिए निकल गए। रास्ते में यम भगवान भी एक कुत्ते का वेश धारण कर पांडवों के साथ चलने लगे। स्वर्ग की ओर जा ही रहे थे की एक—एक कर सभी की मृत्यु होने लगती है जिसकी शुरूआत द्रोपदी से होती है और आखिर में केवल युधिष्ठिर ही अकेले बचते हैं। दरहसल इन सभी के मृत्यु का सबंध उनके अभिमान, अभिलाषा से जुड़ा था। लेकिन युधिष्ठिर ही अकेले थे जिनको किसी बात का अभिमान नहीं था और यही वजह थी की युधिष्ठिर अकेले ही कुत्ते के साथ स्वर्ग के द्वार तक पहुंच जाते हैं और स्वर्ग पहुंचने पर भगवान यम कुत्ते के भेष को त्यागक अपने असली स्वरूप में आ जाते हैं और स्वर्ग प्रस्थान से पहले युधिष्ठिर को नर्क घुमाने के लिए लेकर जाते हैं जहां द्रोपदी और अपने भाईयों को कष्ट भोगता देख युधिष्ठिर बहुत दुखी होते हैं और अपने भाईयों के साथ रहने की जिद करते है लेकिन युधिष्ठिर को स्वर्ग ले जाने आए इंद्र युधिष्ठिर से कहते हैं की जल्द ही आपके भाईयों को भी स्वर्ग लाया जाएगा और ये सुनकर युधिष्ठिर भगवान इंद्र के साथ स्वर्ग स्वर्ग जाते हैं और इसी के साथ द्वापर युग का अंत और कलयुग का शुभारंभ हुआ।

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