Goddess Maa Brahmacharini : 7 अक्टूबर से नवरात्रि का त्यौहार देशभर में शुरू हो चुका है और जैसा कि आप जानते हैं कि नवरात्रि के 9 दिनों में श्रद्धालु मां भगवती के अलग-अलग स्वरूपों की वंदना करते हैं । नवरात्रि का पहला दिन मां भगवती के शैलपुत्री स्वरूप को समर्पित हुआ तो वही नवरात्रि के दूसरे दिन यानी आज श्रद्धालु मां भगवती के ब्रह्मचारिणी स्वरूप का वंदन कर रहे हैं। कहा जाता है कि ब्रह्मचारिणी मां दुर्गा का दूसरा रूप है । नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा के इसी स्वरूप की भक्तृ आराधना करते हैं । माना यह भी जाता है कि मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की सच्चे मन से पूजा करने से आपको यश सिद्धि और विजय की प्राप्ति होती है । ऐसा कहा गया है कि ब्रह्मचारिणी देवी ने भगवान शंकर को अपने पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी और इसलिए मां ब्रह्मचारिणी को तपश्चारिणी के नाम से भी जाना जाता है ।
मां भगवती की आराधना कैसे करें
मां भगवती के इस स्वरूप की वंदना करने के नियम बहुत सरल है लेकिन अगर आप सही ढंग से और सच्चे मन से मां भगवती की आराधना करते हैं तो आपको फल जल्दी मिलता है । वही आज हम अपने इस लेख में आपको नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना कैसे करनी चाहिए और मां की आराधना में किन-किन चीजों का ध्यान रखना चाहिए व किन श्लोकों का जाप करना चाहिए यह आज हम आपको बताने जा रहे हैं।
ये है नियम नवरात्रि के दूसरे दिन आपको सुबह में जल्दी स्नान करके पूजा के स्थान पर गंगाजल छिड़क कर शुद्धि करनी है । इसके बाद मां भगवती के सामने दीप प्रज्वलित करने के बाद मां दुर्गा का गंगाजल से अभिषेक करना है । इसके बाद आप मां दुर्गा को अर्ग दे और अंत में मां को अक्षत, सिंधुर, लाल पुष्प अर्पित करने के साथ ही मां को प्रसाद स्वरूप मिठाई भी चढ़ाएं । इसके बाद धूपबत्ती और दीपक जला कर मां भगवती के समक्ष दुर्गा चालीसा का पाठ करें । मां की आरती करने के बाद भोग लगाए । एक चीज का खासतौर पर ध्यान रखें कि मां को आप सात्विक चीजों का ही भोग लगाएं।
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Goddess Maa Brahmacharini : मां ब्रह्मचारिणी की कथा
मां ब्रह्मचारिणी ने राजा हिमालय के घर में जन्म लिया था । कहा जाता है कि मां ब्रह्मचारिणी ने नारद जी के कहने पर भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी और इस कठोर तपस्या की कारण है उनका नाम ब्रह्मचारिणी से तपश्चारिणी पढ़ा था । कहा जाता है कि भगवान शिव की आराधना के दौरान मां ब्रह्मचारिणी में हजारों सालों तक केवल फल फूल ही खाएं और 100 वर्षों तक वे साग खाकर जीवित रहे अध्यात्मिक कथाओं में इस बात का उल्लेख है कि कठोर तप के कारण मां ब्रह्मचारिणी का शरीर कमजोर हो गया था और मां ब्रह्मचारिणी का तप को देखकर सभी देवी-देवता ऋषि मुनि अत्यंत प्रभावित हुए और उन्होंने मां ब्रह्मचारिणी को वरदान दिया कि देवी आप जैसा कोई नहीं हो सकता आपकी मनोकामनाएं अवश्य पूरी होंगी और भगवान शिव आप को पति रूप में प्राप्त होंगे और ऐसा ही हुआ।
आरती
जय अंबे ब्रह्मचारिणी माता । जय चतुरानन प्रिय सुख दाता ।
ब्रह्मा जी के मन भाती हो। ज्ञान सभी को सिखलाती हो ।
ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा । जिसको जपे सकल संसारा ।
जय गायत्री वेद की माता । जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता ।
कमी कोई रहने ना पाए । कोई भी दुख सहने ना पाए ।
उसकी विरति रहे ठिकाने। जो तेरी महिमा को जाने ।
रुद्राक्ष की माला लेकर । जपे जो मंत्र श्रद्धा देकर ।
आलस छोड़ करे गुणगाना । मां तुम उसको सुख पहुंचाना ।
ब्रह्मचारिणी तेरो नाम । पूर्ण करो सब मेरे काम ।
भक्त तेरे चरणों का पुजारी । रखना लाज मेरी महतारी ।