Gyanvapi Mosque Case : सुप्रीम कोर्ट में सोमवार यानी 1 अप्रैल को ज्ञानवापी परिसर के व्यास तहखाने में पूजा के खिलाफ मस्जिद कमिटी की याचिका पर सुनवाई हुई. इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानवापी के व्यास तहखाने में पूजा पर रोक से मना कर दिया ।कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की ओर से दायर हुई याचिका को खारिज करते हुए कहा कि वहां पर यथास्थिति बरकरार रहेगी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि व्याजजी तहखाने में पूजा होती रहेगी. कोर्ट ने इस मामले में मुस्लिम पक्ष की याचिका पर नोटिस जारी किया , साथ ही सुप्रोम ने आगे निर्देश दिया कि न्यायलय से पूर्व मंजूरी या अनुमति प्राप्त किए बिना इस यथास्थिति को नहीं बदला जा सकता है।
मामले की सुनवाई करते हुए सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा, ‘तहखाने का प्रवेश दक्षिण से और मस्जिद का उत्तर से है. दोनों एक-दूसरे को प्रभावित नहीं करते हैं. हम यह आदेश दे सकते हैं कि फिलहाल पूजा और नमाज दोनों अपनी-अपनी जगह जारी रहें.’
सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की अगुवाई वाली पीठ ने आदेश में कहा,
” इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि 17 जनवरी और 31 जनवरी के आदेशों के बाद मुस्लिम समुदाय द्वारा नमाज़ निर्बाध रूप से पढ़ी जा रही है और हिंदू पुजारी द्वारा पूजा तहखाना के क्षेत्र तक ही सीमित है, इसलिए यथास्थिति बनाए रखना उचित है। ताकि दोनों समुदाय उपरोक्त शर्तों के अनुसार पूजा कर सकें। हिंदुओं द्वारा धार्मिक अनुष्ठान 31 जनवरी, 2024 के आदेश में निहित निर्देशों के अनुसार होंगे, जो कि 17 जनवरी, 2024 के पहले के आदेश में निर्दिष्ट रिसीवर की कस्टडी के अधीन होंगे। उपरोक्त शर्तों से प्राप्त यथास्थिति को इस न्यायालय की पूर्व अनुमति प्राप्त किए बिना डिस्टर्ब नहीं किया जाएगा”
सुप्रीम कोर्ट के आदेश को जानने के साथ ही एक नजर इस पूरे मामले पर भी डाल लेते है, दरअसल देश की अदालतों में लम्बे समय से ज्ञानवापी परिसर और इसके तहखानों को लेकर लड़ाई चल रही है । दरअसल ज्ञानवापी परिसर के अंदर एक तहखाना मौजूद है जिसे व्यास जी का तहखाना कहा जाता है। व्यास जी के तहखाने के अंदर भगवान शिव, कुबेर, श्री गणेश, हनुमान जी और मां गंगा की अति प्राचीन मूर्तियां स्थापित हैं। इस तहखाने में व्यास परिवार कई वर्षों से पूजा अर्चना करता आ रहा था औऱ ये पूजा साल 1993 तक जारी रही लेकिन साल 1993 के दौरान लोहे के रॉड से तहखाने से रास्ता बंद कर दिया गया था. इसके बाद से ही इसे खुलवाने की लड़ाई चल रही है. कई बार अदालतों में व्यास तहखाने में पूजा अर्चना पुन जारी करने का मुद्दा उठा लेकिन बात वही की वही रही ।
हालाकि कई सालों के सघर्ष के बाद साल 2024 की तारीख 17 जनवरी को वाराणसी जिला कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए, हिंदू पक्ष को व्यास जी तहखाने में पूजा करने का आदेश दिया था. इस फैसले को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 31 जनवरी बरकरार रखा था. इन दोनों फैसलों को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 17 जनवरी और 31 जनवरी (तहखाने के अंदर पूजा की अनुमति) के आदेशों के बाद मुस्लिम समुदाय ज्ञानवापी मस्जिद में बिना किसी बाधा के ‘नमाज’ पढ़ते हैं. वहां पर यथास्थिति बनाए रखना जरूरी है.मामले की अगली सुनवाई जुलाई में होगी ।