Dolphin Commits Suicide : एक तरफा प्यार या फिर अधूरी प्रेम कहानी में हारकर आत्महत्या के नजाने कितने ही किस्से आपने सुने होंगे और आज हम भी आपको एक ऐसा ही किस्सा सुनाने जा रहे हैं लेकिन ये किस्सा कोई आम किस्सा नहीं बल्कि एक ऐसी अधूरी प्रेम कहानी है जिसको सुनकर आप भी अपनी आॅंखों में आंसुओं को आने से रोक नहीं पाओगे जी हां ये प्रेम कहानी है एक डोल्फिन और एक महिला की सुनने में थोड़ा अजीब जरूर है लेकिन ये कहानी एक दम सच्ची है। तो बात है सन् 1965 की जब नासा ने कैरेबियाई द्वीप पर एक सीक्रेट प्रोजेक्ट की शुरूआत की। इस प्रोजेक्ट का आधार डोल्फिन के व्यवहार को जानना था और उनपर अध्यन कर उनको इंसानी भाषा सिखाना इस प्रोजेक्ट का मूल उद्देश्य था।
Dolphin Commits Suicide : एक खास तरह की लैब स्थापित की गई

इस प्रोजेक्ट पर गहनता से अध्यन करने के लिए अमेरिकी न्यूरोसाइंटिस्ट डॉक्टर जॉन लिली ने एक खास तरह की लैब स्थापित की। इस लैब में दो मादा और एक नर डॉल्फिन को रखा गया था। मादा डॉल्फिन का नाम पामेला और सिसी था जबकि नर डॉल्फिन का नाम पीटर था। इस प्रोजेक्ट को अंजाम तक पहुंचाने के लिए एक महिला की न्युक्ति की गई जिसका नाम मारग्रेट लोवात था।
Dolphin Commits Suicide : मारग्रेट रखती थी पीटर पर नजर

मारग्रेट का काम था पीटर पर नज़र रखना और उसके व्यवहार को जानकर उसे इंसानी भाषा सिखाना। मारग्रेट अपने काम को बखूबी कर रही थी लेकिन उसके मन में विचार आया की काम को सही तरीके से अंजाम तभी दिया जा सकता है जब वो पीटर के साथ 24 घंटे रहे और उसने ये फैसला किया की वो अपना सारा समय पीटर के साथ ही गुजारेगी जिसके लिए मारग्रेट के कमरे को पानी से भरा गया और ऐसी व्यवस्था की गई कि मारग्रेट के घुटने तक पानी रहे, जिसमें पीटर आराम से घूमता रहे। अब दोनों साथ रहते थे और पीटर मारग्रेट के साथ ही खेलते था और उसी के साथ खाना भी खाता था। समय बीतता गया और पीटर मारग्रेट से प्यार करने लगा। पीटर अपना प्यार जताने के लिए अक्सर मारग्रेट के पैरों के पास बैठ जाता और अपनी स्किन को मारग्रेट के पैरों से रगड़ता रहता और समय के साथ—साथ पीटर को मारग्रेट की आदत सी पड़ गई और प्यार इतना बढ़ गया मानों जुदाई अब नामुमकिन थी।
Dolphin Commits Suicide : लैब को बंग करने का लिया गया फैसला

पीटर और मारग्रेट करीब छह महीनों तक साथ रहे। लेकिन एक दौर ऐसा आया जिसकी पीटर और मारग्रेट ने कभी कल्पना भी नहीं की थी। दरहसल लैब के मालिक जॉन लिली का इस प्रोजेक्ट से मन उभता चला गया और बात यहां तक आ गई की लैब को बंद कर दिया गया और फंडिंग न होने की वजह से तीनों डॉल्फिनों को मियामी में एक छोटी सी जगह शिफ्ट करने का फैसला लिया गया। पीटर इस बात से अंजान था और हर रोज़ की तरह आज भी वो मारग्रेट के पास आया और उसे उसी तरह अपनी अठखेलियों से हंसाने की कोशिश करने लगा जैसे वो रोज़ किया करता था लेकिन आज मारग्रेट के चेहरे से हंसी मानों गुम सी थी और आॅंखें आंसुओं से भरी हुई थी। मारग्रेट जानती थी की आज वो पीटर को आखरी बार देख रही है और वो इस बात से काफी दुखी थी की वो अब पीटर से दूर हो जाएगी। मारग्रेट पीटर को साथ रखना चाहती थी लेकिन पीटर को साथ रखना उसकी पहुंच से काफी दूर था और आखिरकार वो समय आ ही गया जब पीटर को दो और डोल्फिनों से साथ दूसरी जगह शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू की गई।
Dolphin Commits Suicide : और पीटर ने कर ली आत्महत्या

Dolphin Commits Suicide :
पीटर अभी भी इस बात से अंजान था की वो अब मारग्रेट को कभी नहीं देख पाएगा लेकिन इस बात को देखकर काफी हैरान भी था आखिर उसको कहां लेकर जाया जा रहा है। आखिरकार पीटर को दूसरी जगह शिफ्ट किया गया और कुछ समय बाद मारग्रेट को ख़बर मिली की पीटर की मौत हो गई है। पीटर की मौत की वहज जानकर हैरानी तो तब हुई जब लैब तैयार करने वाली डॉक्टर लिली ने बताया कि पीटर की कोई साधारण मौत नहीं हुई है बल्कि उसने सुसाइड किया है। दरहसल आपमें से शायद कम ही लोग जानते होंगे की डोल्फिन एक ऐसी प्रजाति है जो इंसानों की तरह मैमल्स होती हैं और मछलियों की तरह डोल्फिन्स के कोई गिल्स नहीं होते जिसकी वजह से उन्हें 10 सेकेंड से 3 मिनट के भीतर पानी की सतह पर सांस लेने के जरूर आना पड़ता है। पीटर मारग्रेट से जुदा होने के बाद इतना उदास हो गया की वो सांस लेने के लिए पानी से बाहर आया ही नहीं जिसकी वजह से वो पानी में डूबता चला गया और धीरे—धीरे उसके प्राण शरीर से अलग हो गए और ऐसे पीटर की इस प्रेम कहानी का बुरा अंत हुआ।
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जंगल का राजा कहलाने वाला शेर बूढ़ा होने पर आत्महत्या कर लेता है आपको यह बात सुनने में भले ही अजीब लग रही हो लेकिन यह बात बिल्कुल सच है कि शेर बूढ़ा होने पर आत्महत्या कर लेता है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्यों है ? जिस शेर की दहाड़ से जंगल का हर जानवर चौकन्ना हो जाता है और अपनी जान बचाने को इधर-उधर भागने लगता है आखिर क्यों वह खूंखार शेर बूढ़ा होने पर अपनी मर्जी से मौत को गले लगा लेता है ? आज हम आप आपको इस लेख में इन सभी सवालों का जवाब देने जा रहे कि आखिर क्यों जंगल का राजा कहलाने वाला शेर आत्महत्या कर लेता है और किस वजह से वह ऐसा करने पर मजबूर होता है।दोस्तों यह बात तो आपने सुनी ही होगी कि शेर जंगल का राजा होता है। लेकिन जंगल का राजा कहलाने वाला शेर अपने अंतिम समय में काफी परेशानियों का सामना करता है और बेहद अकेला महसूस करता है। बूढ़ा होने पर शेर की स्थिति इतनी बुरी हो जाती है कि उसके पास आत्महत्या करने के सिवा कोई रास्ता बचता नहीं है और वह मौत को ही चून्ना आसान समझता है।