Lake Of No Return : भारत में कई ऐसे जगह हैं जहां की रोचकता को निहारने के लिए देश विदेश से लोग खींचे चले आते हैं लेकिन भारत के अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर एक ऐसी झील है जिसे ‘ए लेक ऑफ नो रिटर्न’ के नाम से भी जाना जाता है। जिसका सीधे शब्दों में मतलब है कि जो भी इस झील में जाता है वो वापस लौटकर कभी नहीं आता। और यही वजह है कि इस झील का नाम ए लेक ऑफ नो रिटर्न रखा गया है।
कहा जाता है कि द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान अमेरिका ने यहां पर जमीन समझकर आपातकालीन लैंडिंग करा दी थी जिसके बाद हवाई जहाजों के साथ कई कर्मचारी अपने आप ही गायब हो गए थे और तभी से इस झील का नाम ए लेक ऑफ नो रिटर्न के नाम से विख्यात हो गया यह झील 1.4 किलोमीटर लंबी है और 0.8 किलोमीटर चौड़ी है झील के आसपास यदि दूर-दूर तक नजर डालें तो कुछ भी नजर नहीं आता इसके आसपास का इलाका ज्यादातर बंजर है।
Lake Of No Return :

Lake Of No Return : झील से जुड़ी कई लोक कथाएं हैं प्रचलित
इस झील से जुड़ी कई लोककथाएं प्रचलित है कहा जाता है की इस झील का कनेक्शन द्वितीय विश्व युद्ध से भी जुड़ा हुआ है। प्रचलित कथाओं के अनुसार जब युद्ध के बाद जापानी सैनिक वापस लौट रहे थे तो वह अपना रास्ता भटक गए थे और चलते-चलते सैनिक इस झील के पास पहुंचे और रहस्यमयी तरीके से गायब हो गए। जिसके बाद उन सैनिकों को ढूंढ़ने के लिए झील के पास अमेरिकी सैनिकों को परीक्षण के लिए भेजा गया लेकिन वह भी वापस नहीं लौटे।
यही नहीं कहा ये भी जाता है कि 1942 में ब्रिटिश सैनिकों का एक समूह झील के पास मौजूद रेत में धंस गया था। इन सैनिकों को ढूंढने के लिए सर्च ऑपरेशन भी शुरू किए गए लेकिन कई दिनों की ढूंढ खोज के बाद भी सैनिकों का कुछ पता नहीं लग पाया।
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Lake Of No Return : रातो रात जलमग्न हो गया था पूरा गांव
स्थानीय लोगों की माने तो एक समय में इस नदी के किनारे एक गांव हुआ करता था और गांव के कुछ लोगों द्वारा एक बार झील से एक बड़ी मछली को पकड़ा गया और इस उपलक्ष में पूरे गांव में पार्टी का आयोजन किया गया इस पार्टी में गांव के सभी लोगों को आमंत्रित किया गया लेकिन जश्न में एक बूढ़ी औरत और उसकी पोती शामिल नहीं हुई। लोक कथाओं के अनुसार बूढ़ी औरत को अंदेशा था कि कुछ बड़ी अनहोनी होने वाली है और इस कारण बूढ़ी औरत अपनी पोती को लेकर जंगल की ओर भाग गई और उसी रात पूरा का पूरा गांव इस झील में समाकर जलमग्न हो गया था यह नहीं कहा यह भी जाता है कि गांव के लोग अक्सर मछलियां पकड़ने के लिए झील में आया करते थे और एक बार गांव में त्योहार मनाने के लिए भोजन स्वरूप झील से काफी मात्रा में मछलियों को पकड़ा गया जिसके बाद एक बुजुर्ग व्यक्ति ने गांव वालों से कहा कि उसके सपने में भगवान आए थे और उन्होंने बताया की पकड़ी गई मछलियों में से 3 बच्चे भगवान के हैं और उन्हें वापस झील में ही छोड़ दिया जाए लेकिन गांव वालों ने उस व्यक्ति पर भरोसा नहीं किया।

जिसके बाद नाराज होकर वह बूढ़ा व्यक्ति पड़ोस के गांव में चला गया और जब अगली सुबह वापस आकर गांव में देखा तो पूरा गांव तहस नहसहो गया था और चारों ओर पानी ही पानी नजर आ रहा था कई लोगों का ऐसा भी मानना है कि झील में कोई बड़ा जीव रहता है जो झील में या फिर झील के आसपास जाने वाले लोगों को अपना ग्रास बना लेता है…….कहानियां कई है लेकिन इस झील का रहस्य आज भी एक रहस्य ही बना हुआ है।