उत्तराखंड सरकार भले ही स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने के लाख दावे करे, लेकिन धरातल पर हालात इससे इतर हैं। इसी की एक बानगी है ब्लॉक भैंसियाछाना के ब्लॉक मुख्यालय धौलछीना का अस्पताल भवन। जहां करीब ढाई करोड़ रुपये की लागत से भवन निर्माण तो कर दिया।
मगर घोषणा के 18 साल बाद भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अस्तित्व में नहीं आ सका है। ब्लॉक की करीब 50 हजार की जनसंख्या को आज भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधा के लिए जिला मुख्यालय पर निर्भर रहना पड़ता है। ब्लॉक की बड़ी जनसंख्या को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के उद्देश्य से 2004 में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र धौलछीना का उच्चीकरण कर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनाने की घोषणा की थी।
वर्ष 2007 में 2 करोड़ 47 लाख रुपए की लागत से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र धौलछीना का भवन निर्माण शुरू हुआ। निर्माण एजेंसी सीएनडीएस रानीखेत ने भवन का निर्माण किया था। तत्कालीन सीएम भुवन चंद्र खंडूड़ी ने भवन का लोकार्पण भी किया। वर्ष 2012 में भवन स्वास्थ्य विभाग को हस्तांतरित किया गया। लेकिन आज तक सीएचसी का संचालन तक नहीं हो सका।
पदों के सृजन की भी नहीं मिल सकी स्वीकृति
अस्पताल भवन में ओपीडी ,जनरल वार्ड, इमरजेंसी वार्ड , सीनियर-जूनियर डॉक्टरों को अलग-अलग कमरे बने हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र धौलछीना का बोर्ड भी लगा दिया गया। लेकिन 18 साल बीतने के बाद भी ग्रामीण जनता को इसका लाभ नहीं मिल सका है।
हायर सेंटर रेफर करना बनी मजबूरी
क्षेत्र में मोटर दुर्घटना में गंभीर मरीजों को हायर सेंटर रेफर करना मजबूरी है। एक्सरे मशीन, अल्ट्रासाउंड मशीन व अन्य उपकरणों की कमी से ब्लॉक की जनता को मीलों दूर जिला मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ती है। अस्पताल में डॉक्टर व अन्य स्टाफ के रहने के लिए आवासीय भवन भी बनाए गए हैं।
सीएचसी धौलछीना के भवन में वर्तमान में पीएचसी टाइप टू चल रहा है। सीएचसीका संचालन शुरू करने को शासन को पूर्व में कई बार प्रस्ताव भेजे हंै। शासन स्तर पर ही मामला अटका हुआ है।