आयोग से पेपर चोरी हो गया, अफसर सोए रहे; एसटीएफ ने स्वीकारी आयोग की लापरवाही

सचिवालय रक्षक भर्ती का पेपर उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के प्रिंटिंग प्रेस से चोरी हो गया और अफसरों को भनक तक नहीं लगी। आयोग में पेपर छापने जैसे संवेदनशील काम के दौरान वहां चेकिंग या निगरानी क्यों नहीं की गई, जो निजी कंपनी का कर्मचारी पेन ड्राइव में पेपर ले गया।

निजी कंपनी के कर्मचारी ने की पेपर चोरी
यहां तक कि आयोग की प्रेस में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी क्या कभी देखी नहीं गई ? जिससे इस करतूत का पता चल सकता। निजी कंपनी के कर्मचारी और उसकी टीम के पास पेपर सेट करने या छापने के दौरान आयोग के कोई जिम्मेदार अफसर या कर्मचारी नहीं थे ? जो आरोपी ने पेपर चोरी की हिमाकत कर डाली।

एसटीएफ ने स्वीकारी आयोग की लापरवाही
इन तमाम सवालों को लेकर एसटीएफ के अफसर आयोग की लापरवाही स्वीकार रहे हैं, इसको लेकर कई लोगों से पूछताछ भी की गई है। एसटीएफ के मुताबिक, भर्ती परीक्षा से एक सप्ताह पहले लखनऊ की निजी कंपनी के कर्मचारी ने पेपर सेट करने और छपवाने के दौरान पेपर चोरी किया था। सूत्रों ने बताया कि आयोग के कई अफसरों एवं कर्मचारियों से इस बारे में पूछताछ भी की गई है।

चयन आयोग के अफसरों पर शिकंजा क्यों नहीं ?
कई भर्ती परीक्षाओं में पेपर आउट होने की बात सामने आने के बावजूद अब तक उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के किसी भी अफसर को प्रत्यक्ष तौर पर जांच के दायरे में नहीं लाया गया है। जबकि, इनकी सीधे जिम्मेदारी बनती है। इस पर पुलिस के एक उच्चाधिकारी ने बताया कि फिलहाल आयोग के अफसरों का सीधा हाथ नजर नहीं आ रहा है। भर्ती परीक्षा की गोपनीयता रखना पूरी तरह आयोग की जिम्मेदारी थी, इसलिए वो गंभीर लापरवाही और अपराध की सीमा पर खड़े नजर आ रहे हैं। हालांकि, अभी वे पुलिस को पूरा सहयोग कर रहे हैं, कुछ मामलों में उन्होंने खुद गड़बड़ी की सूचना भी दी।

क्या कहा एसटीएफ ने
एसटीएफ के एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से पेपर चोरी के मामले में अफसरों और कर्मचारियों की लापरवाही से इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन आपराधिक संलिप्तता के बारे में अभी नहीं कहा जा सकता। कुछ लोगों से पूछताछ की गई है। इस मामले में सामने आने वाले तथ्यों को जांच में शामिल किया जाएगा।

बीस हजार रुपए वेतन वाले कर्मचारियों के हवाले परीक्षा
अफसरों के मुताबिक, आयोग किसी भी तरह स्किल आधारित काम करने के लिए आउटसोर्सिंग कंपनियों पर निर्भर है। कंपनी के अधिकतम बीस हजार मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारी परीक्षा से जुड़े सभी गोपनीय काम करते हैं। इस कारण नकल माफिया उन्हें आसानी से अपने चंगुल में फंसाने में कामयाब रहा। उधर, एसटीएफ ने आयोग में जिस जगह पर पेपर छापा गया, वहां का निरीक्षण किया गया। जिस लैपटॉप में पेपर तैयार किया गया, उसे भी कब्जे में लिया गया। जिस दिन छपाई हुई थी, तब की सीसीटीवी फुटेज भी कब्जे में ली गई।